पॉलीहाउस ने बदली बीरा देवी की जिंदगी, खेती बनी आत्मनिर्भरता की मजबूत राह

-ग्रामोत्थान परियोजना से मिला संबल, सरकारी सहायता
-बैंक ऋण और स्वयं के निवेश से खड़ा किया व्यक्तिगत उद्यम
-अब परिवार की जरूरतें पूरी करने के साथ दूसरी महिलाओं को भी कर रहीं प्रेरित

रुद्रप्रयाग। पहाड़ में सीमित आजीविका के साधनों और आर्थिक चुनौतियों के बीच यदि सही मार्गदर्शन, सरकारी योजनाओं का सहयोग और कुछ नया करने का दृढ़ संकल्प मिल जाए, तो खेती-किसानी भी आत्मनिर्भरता की मजबूत नींव बन सकती है। इसकी प्रेरक मिसाल विकासखंड जखोली के ग्राम चैरा निवासी बीरा देवी हैं, जिन्होंने पॉलीहाउस तकनीक को अपनाकर स्वरोजगार की दिशा में कदम बढ़ाया और अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाने की राह तैयार की।
ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के सीमित अवसरों के कारण अनेक परिवारों को आजीविका के लिए संघर्ष करना पड़ता है। ऐसे में आधुनिक कृषि तकनीक महिलाओं के लिए स्वरोजगार के नए अवसर खोल रही है। बीरा देवी ने भी पारंपरिक आजीविका के विकल्प के रूप में पॉलीहाउस तकनीक को अपनाया। ग्रामोत्थान परियोजना, रुद्रप्रयाग के माध्यम से उनका चयन व्यक्तिगत उद्यम स्थापित करने के लिए किया गया। परियोजना के सहयोग से उन्हें अपना काम शुरू करने का अवसर मिला और उन्होंने उपलब्ध संसाधनों का उपयोग कर आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम बढ़ाया।
बीरा देवी के व्यक्तिगत उद्यम को आगे बढ़ाने के लिए कुल एक लाख रुपये की धनराशि जुटाई गई। इसमें ग्रामोत्थान परियोजना की ओर से 30 हजार रुपये की सहायता राशि प्रदान की गई, जबकि 50 हजार रुपये का बैंक ऋण लिया गया। इसके अतिरिक्त बीरा देवी ने अपने स्तर से 20 हजार रुपये का अंशदान किया। इस प्रकार सरकारी सहायता, बैंक ऋण और स्वयं के निवेश के समन्वय से उनके उद्यम की नींव रखी गई। यह पहल दर्शाती है कि योजनाओं का लाभ यदि जरूरतमंद ग्रामीण परिवारों तक प्रभावी ढंग से पहुंचे, तो महिलाएं भी अपने स्तर पर आर्थिक गतिविधियां शुरू कर सकती हैं। पॉलीहाउस जैसी तकनीक खेती को व्यवस्थित रूप देने और उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करने का अवसर प्रदान करती है।
बीरा देवी का कहना है कि पॉलीहाउस ने उन्हें आत्मनिर्भर बनने का अवसर दिया है। अब वह अपने परिवार की जरूरतें स्वयं पूरी करने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। उनके अनुसार, स्वरोजगार से जुड़ने के बाद उनमें आत्मविश्वास बढ़ा है। वह चाहती हैं कि गांव की अन्य महिलाएं भी आगे आएं और खेती तथा स्वरोजगार से जुड़कर अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत करें। बीरा देवी की यह पहल ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा बन सकती है। इससे यह संदेश मिलता है कि महिलाएं अवसरों और संसाधनों का सही उपयोग कर परिवार की आर्थिक मजबूती में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
मुख्य विकास अधिकारी राजेंद्र रावत ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार को बढ़ावा देना और स्थानीय स्तर पर आजीविका के अवसर विकसित करना महत्वपूर्ण है। ग्रामोत्थान परियोजना के माध्यम से ग्रामीण परिवारों को व्यक्तिगत उद्यम स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है, ताकि वे अपनी क्षमताओं और उपलब्ध संसाधनों के आधार पर आर्थिक रूप से सशक्त बन सकें। उन्होंने कहा कि महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने वाली ऐसी पहलें ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में सहायक हो सकती हैं। जरूरत है कि ग्रामीण क्षेत्रों में उपलब्ध संभावनाओं को पहचानकर आधुनिक तकनीक और योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाया जाए। बीरा देवी की पहल पहाड़ की उस तस्वीर को सामने लाती है, जहां महिलाएं केवल परिवार की जिम्मेदारियां निभाने तक सीमित नहीं, बल्कि आर्थिक बदलाव की वाहक भी बन रही हैं। ग्राम चैरा की यह कहानी बताती है कि सही अवसर और दृढ़ इच्छाशक्ति के सहारे गांव में ही स्वावलंबन की नई राह बनाई जा सकती है।

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