देहरादून। हर खेत तक पानी पहुंचाने और कम पानी में अधिक उत्पादन का लक्ष्य लेकर शुरू की गई प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (पीएमकेएसवाई ) के ‘पर ड्रॉप मोर क्रॉप’ (पीडीएमसी) योजना में भारी अनियमितताएं हुई हैं। योजना पर इतनी भारी भरकम राशि खर्च किये जाने के बावजूद योजना का लाभ किसानों को नहीं मिला और खेत सूखे रह गये। आरटीआई एक्टिविस्ट विकेश नेगी ने खुलासा किया है कि योजना पर धरातल पर काम ही नहीं हुआ और करोड़ों रुपये व्यय कर दिये गये। उन्होंने इस संबंध में सबंधित जिलाधिकारियों को शिकायती पत्र भेजे हैं। देहरादून के जिलाधिकारी को भी शिकायत की। इस शिकायत के आधार पर डीएम आशीष चौहान ने मामले की जांच के लिए मजिस्ट्रियल जांच बिठा दी है।
आरटीआई एक्टिविस्ट विकेश ने पीएमकेएसवाई योजना के तहत कृषि एवं उद्यान विभाग से विभिन्न जानकारी मांगी। आरटीआई दस्तावेज से पता चला कि प्रदेश के विभिन्न जिलों में योजना का लाभ पात्र किसानों को मिला ही नहीं। ड्रिप इरिगेशन प्रणाली काम ही नहीं कर रही है। कृषि एवं उद्यान विभाग के माध्यम से इस योजना के तहत अब तक करीब 400 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जाने के बावजूद कई जिलों में स्थापित ड्रिप सिंचाई प्रणालियां किसानों के खेतों में अनुपयोगी पड़ी मिली हैं।
योजना के संबंध में संबंधित थर्ड पार्टी मूल्यांकन, चार्टर्ड अकाउंटेंट की ऑडिट रिपोर्ट, कैग की ऑडिट रिपोर्ट और आंतरिक ऑडिट में लाभार्थी सत्यापन, दस्तावेजों के रखरखाव, निरीक्षण, निगरानी और योजना के दिशा-निर्देशों के अनुपालन को लेकर कई गंभीर अनियमितताएं सामने आने का दावा किया गया है। मामले की निष्पक्ष जांच के लिए राज्य के सभी जिलाधिकारियों को शिकायत भेजी गई है। कई जिलों में मुख्य विकास अधिकारियों को जांच अधिकारी बनाया गया है, जबकि देहरादून में जिलाधिकारी ने मामले की मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए हैं।
पौड़ी में पाइप के अवशेष मिले
थर्ड पार्टी मूल्यांकन के दौरान पौड़ी गढ़वाल में वर्ष 2016-17 और 2017-18 में स्थापित ड्रिप सिंचाई प्रणालियों की स्थिति का जायजा लिया गया। मूल्यांकन में सामने आया कि कई किसानों ने योजना का लाभ तो लिया, लेकिन बाद में रखरखाव और तकनीकी सहायता के अभाव में ड्रिप सिस्टम काम करना बंद कर गए। कई खेतों में पूरी प्रणाली के स्थान पर केवल ड्रिप पाइप के अवशेष पाए जाने की बात मूल्यांकन में सामने आई। कुछ मामलों में सामग्री किसानों को उपलब्ध कराई गई थी, लेकिन ड्रिप सिंचाई प्रणाली की विधिवत स्थापना नहीं की गई थी। इससे योजना के वास्तविक उद्देश्य और उस पर हुए सरकारी खर्च को लेकर सवाल खड़े होते हैं।
रुद्रप्रयाग में सिस्टम मिला, प्रशिक्षण नहीं
रुद्रप्रयाग में भी थर्ड पार्टी मूल्यांकन के दौरान किसानों से मिली जानकारी ने योजना के क्रियान्वयन की तस्वीर पर सवाल उठाए। किसानों के अनुसार कुछ मामलों में आपूर्तिकर्ताओं ने केवल सामग्री उपलब्ध कराई, लेकिन ड्रिप सिस्टम की विधिवत स्थापना, परीक्षण और संचालन का प्रशिक्षण नहीं दिया गया। नतीजा यह रहा कि किसान उपलब्ध कराई गई तकनीक का सही तरीके से इस्तेमाल और रखरखाव नहीं कर सके। ऐसी स्थिति में जिस माइक्रो इरिगेशन तकनीक के माध्यम से पानी की बचत और कृषि उत्पादकता बढ़ाने का लक्ष्य था, उसका अपेक्षित लाभ किसानों तक नहीं पहुंच सका।
पिथौरागढ़ में भी सामने आई ऐसी ही तस्वीर
पिथौरागढ़ में किए गए मूल्यांकन में भी कई किसानों को केवल पाइप, फिल्टर और ड्रिपर उपलब्ध कराए जाने की बात सामने आई। सिस्टम की स्थापना और किसानों को आवश्यक प्रशिक्षण नहीं मिलने के कारण बड़ी संख्या में लाभार्थी योजना के वास्तविक लाभ से वंचित रहे। यह स्थिति इस सवाल को जन्म देती है कि यदि किसान को उपकरण तो उपलब्ध करा दिए जाएं, लेकिन उसे सिस्टम स्थापित करने, चलाने और उसका रखरखाव करने का प्रशिक्षण न मिले तो योजना पर खर्च की गई राशि का वास्तविक परिणाम कैसे सुनिश्चित होगा।
ऑडिट में सत्यापन और अभिलेखों पर सवाल
योजना के लेखों के परीक्षण के दौरान चार्टर्ड अकाउंटेंट की ऑडिट रिपोर्ट में भी कई गंभीर अनियमितताओं की ओर संकेत किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार लाभार्थियों के सत्यापन, दस्तावेजों के रखरखाव, निरीक्षण प्रक्रिया और अभिलेखों के संधारण से संबंधित कमियां सामने आईं। इसके अलावा योजना के क्रियान्वयन में शासनादेशों के अनुपालन, निगरानी एवं मूल्यांकन प्रक्रिया तथा संबंधित दिशा-निर्देशों के पालन को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। शिकायत में कैग और आंतरिक ऑडिट से संबंधित आपत्तियों का भी उल्लेख किया गया है।