अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी नेतृत्व को एक कड़ा अल्टीमेटम दिया है, जिसमें उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि तेहरान प्रदर्शनकारियों को फाँसी देना शुरू करता है, तो संयुक्त राज्य अमेरिका “बहुत कड़ी कार्रवाई” करेगा। यह चेतावनी ईरान में चल रही व्यापक अशांति के बीच आई है, जहाँ 26 वर्षीय इरफ़ान सुल्तानी को पहली फाँसी दिए जाने की खबरें मिल रही हैं।
व्हाइट हाउस की ओर से बढ़ती बयानबाजी और ईरान में मौतों का आँकड़ा 3,000 के पार पहुँचने की खबरों ने दोनों देशों के संबंधों को एक नए संकट की ओर धकेल दिया है। मंगलवार, 13 जनवरी 2026 को मिशिगन में एक संबोधन के दौरान ट्रंप ने संकेत दिया कि हवाई हमले (airstrikes) जैसे सैन्य विकल्प भी विचाराधीन हैं।
ट्रंप का संदेश: “मदद आ रही है”
मिशिगन में एक विनिर्माण संयंत्र के दौरे पर ट्रंप ने ईरानी प्रदर्शनकारियों से कहा, “ईरानी देशभक्तों, विरोध जारी रखें—अपने संस्थानों पर कब्ज़ा करें! हत्यारों और दुर्व्यवहार करने वालों के नाम बचाकर रखें। उन्हें इसकी बड़ी कीमत चुकानी होगी।” उन्होंने आगे कहा, “मदद आ रही है,” हालाँकि उन्होंने इस मदद के स्वरूप का खुलासा नहीं किया।
सीबीएस न्यूज (CBS News) को दिए एक साक्षात्कार में ट्रंप ने फाँसी की संभावना पर तीखी प्रतिक्रिया दी:
“अगर वे ऐसा कुछ करते हैं, तो हम बहुत कड़ी कार्रवाई करेंगे। जब वे हज़ारों लोगों को मारना शुरू करते हैं — और अब आप मुझे फाँसी के बारे में बता रहे हैं। हम देखेंगे कि यह उनके लिए कैसा रहता है।”
राष्ट्रपति ने यह भी पुष्टि की कि उन्होंने ईरानी अधिकारियों के साथ सभी बैठकें रद्द कर दी हैं जब तक कि प्रदर्शनकारियों की “निरर्थक हत्या” बंद नहीं हो जाती।
इरफ़ान सुल्तानी: संकट का चेहरा
अंतरराष्ट्रीय आक्रोश का केंद्र इरफ़ान सुल्तानी का मामला है। तेहरान के पास करज के रहने वाले 26 वर्षीय सुल्तानी को 8 जनवरी को गिरफ्तार किया गया था। उन पर “मोहारेबे” या “ईश्वर के विरुद्ध युद्ध छेड़ने” का आरोप लगाया गया है।
एमनेस्टी इंटरनेशनल और मानवाधिकार समूहों ने चेतावनी दी है कि सुल्तानी को कानूनी सहायता नहीं दी गई और उनका मुकदमा केवल कुछ दिनों में समाप्त कर दिया गया। उनकी फाँसी बुधवार, 14 जनवरी 2026 को निर्धारित होने की सूचना है।
हताहतों की संख्या में वृद्धि: विरोधाभासी रिपोर्टें
ईरान में संचार माध्यमों पर पूर्ण प्रतिबंध के कारण मौतों की सटीक संख्या का पता लगाना कठिन है।
-
कार्यकर्ताओं का अनुमान: मानवाधिकार कार्यकर्ता समाचार एजेंसी (HRANA) ने कम से कम 2,571 लोगों की मौत की सूचना दी है।
-
आधिकारिक स्वीकारोक्ति: ईरानी सरकारी टेलीविजन ने पहली बार स्वीकार किया है कि देश ने “कई शहीद” खोए हैं, हालाँकि उसने इसका दोष “आतंकवादियों” पर मढ़ा है।
-
अपुष्ट खबरें: कुछ आंतरिक रिपोर्टों के अनुसार, मौतों की संख्या 3,000 तक पहुँच सकती है और 18,000 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया है।
एक गहराता संकट
ईरान में यह अशांति दिसंबर 2025 के अंत में शुरू हुई थी, जब व्यापारियों ने बढ़ती महंगाई और ईरानी रियाल की गिरती कीमत के खिलाफ विरोध शुरू किया था। जल्द ही यह आंदोलन पूरे देश में फैल गया और अब यह सीधे तौर पर शासन के खिलाफ एक बड़ी चुनौती बन गया है।
यह तनाव जून 2025 में हुए उन हवाई हमलों के बाद और बढ़ गया है, जिसमें अमेरिका ने ईरानी परमाणु ठिकानों को निशाना बनाया था। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने कहा कि “हवाई हमले राष्ट्रपति के पास उपलब्ध कई विकल्पों में से एक हैं।”
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
-
यूरोपीय संघ: यूरोपीय संघ की प्रमुख उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने हिंसा की निंदा की और नए प्रतिबंधों का वादा किया।
-
भारत: विदेश मंत्रालय ने बुधवार को एक नई एडवाइजरी जारी की है, जिसमें भारतीय नागरिकों को अगली सूचना तक ईरान की यात्रा से बचने की सख्त सलाह दी गई है।
-
रूस: मॉस्को ने इसे ईरान के आंतरिक मामलों में “बाहरी हस्तक्षेप” बताया है और अमेरिकी धमकियों को अस्वीकार्य करार दिया है।
जैसे ही बुधवार को तेहरान में सूरज उगेगा, पूरी दुनिया की नज़रें इस बात पर टिकी होंगी कि क्या ईरानी न्यायपालिका अंतरराष्ट्रीय दबाव के आगे झुकेगी या इरफ़ान सुल्तानी की फाँसी के साथ वाशिंगटन की “कड़ी कार्रवाई” को आमंत्रित करेगी।